Tuesday, July 31, 2018

दोस्त अब थकने लगे हैं

दोस्त अब थकने लगे हैं
किसी का पेट निकल आया है
किसी के बाल पकने लगे हैं

सब पर भारी सी कोई जिम्मेदारी है
सब को छोटी मोटी कोई बीमारी है

दिन भर जो भागते दौड़ते थे
वो अब चलते चलते भी रुकने लगे हैं

पर ये हक़ीक़त है
सब दोस्त थकने लगे हैं
किसी को हाउसिंग लोन की फिक्र है
तो कहीं फूल बॉडी चेक अप का जिक्र है

फुर्सत की सभी को कमी है
आँखों में अजीब सी नमी है

कल तक जो प्यार के खत और मैसेज लिखते थे
आज बीमे के फार्म भरने में लगे हैं

बड़ी कड़वी सी जबान है
अब सब दोस्त थकने लगे हैं ...

By I am nature #0012

Sunday, July 29, 2018

पंच तत्व ...

प्रेम, 
वायु है जो दिखता नहीं
पर होता है महसूस,

जल है जो पारदर्शी है,
जो अपने में सब समेट लेता है
किसी भी रूप में ढल जाता है

ग्नि है,
जब होता है तो रोशनी देता है
ज्यादा हो जाने पर सब जला देता है
खत्म होने पर सिर्फ ख़ाक रह जाता है

आकाश है,
अपार होता है, अनंत होता है
कभी कभी
पहुंच से दूर भी,

पृथ्वी है,
एक खोखली पृथ्वी
जिसमे रहने वाले लोग
चाँद की फरमाइश करते हैं !!
By I am nature #0011

Monday, July 23, 2018

यह मेरा जीवन है ...

जो होता है वो होने दो
यह पौरुश हीन कथन है 
जो चाहेंगे सो ढालेंगे 
यह मेरा जीवन है II

मैं नित नवीन बाधाओं को पार कर
हर बंद विवेचनाओं को त्याग कर 
सदैव लड़ा, लाद कर हर नयी उम्मीद
जीवन चला, चल दौड़ा नित नवीन मार्गों पर 

कभी धूप कढ़ी धूप
झुलसाती बाँहें मेरी 
रंग उड़े, अहं बहा, निर्मम शांत 
भारी बारिश में कहीं

बढ़ा चला जो ठाना कभी 
कर के रहूँगा जो सोचा सभी
श्वांस हो अंतिम हवा में जब

रुकूँगा तभी सोऊँगा जब ...

यह मेरा जीवन है II

By I am nature #0010