Sunday, July 29, 2018

पंच तत्व ...

प्रेम, 
वायु है जो दिखता नहीं
पर होता है महसूस,

जल है जो पारदर्शी है,
जो अपने में सब समेट लेता है
किसी भी रूप में ढल जाता है

ग्नि है,
जब होता है तो रोशनी देता है
ज्यादा हो जाने पर सब जला देता है
खत्म होने पर सिर्फ ख़ाक रह जाता है

आकाश है,
अपार होता है, अनंत होता है
कभी कभी
पहुंच से दूर भी,

पृथ्वी है,
एक खोखली पृथ्वी
जिसमे रहने वाले लोग
चाँद की फरमाइश करते हैं !!
By I am nature #0011

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