अगर हम पृथ्वी के केंद्र से होते हुए एक सुरंग बनाये... जो सुरंग पृथ्वी के आर पार होती हो और हम सुरंग में कूद जाए तो.. क्या होगा ?
सबसे पहली बात... ये आपके लिए एक अच्छा अनुभव साबित नही होने वाला है ऑफ़कोर्स पृथ्वी का केंद्र जहाँ तापमान लगभग सूर्य की सतह के बराबर और प्रेशर "30 लाख गाडियो" को सर पे उठाने के बराबर है... वहां किसी इंसान के जीवित रहने की कल्पना नही की जा सकती इतना अधिक प्रेशर आपके फेफड़े को collapse कर देगा और तापमान आपके शरीर को मूलभूत कणो में विखंडित कर देगा I
फिर भी.. As A Thought Experiment... Lets Ignore Temperature & Pressure.. मान लीजिये हम ये सुरंग बना लेते हैऔर... इस ब्लॉग पेज की मालकिन सुश्री भावना उर्फ़ "भवानी" को इसमें धक्का दे देते है तो क्या होगा? सबसे पहली बात.. सुरंग का ये सफ़र... बहुत "छिलाऊ" अनुभव होगा?
चूँकि पृथ्वी लगातार अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूम रही है (Including You) तो जब भावना जी इस सुरंग में छलांग लगायेगी .... तो गिरते वक़्त भी उनका शरीर पश्चिम से पूर्व की ओर गतिमान रहेगा पर चूँकि पृथ्वी की निचली सतहें... ऊपरी सतह के मुकाबले धीमी गति से घूमती है इस कारण... गिरते वक़्त भावना जी... सुरंग की दीवारो से रगड़ खाते हुए नीचे गिरेंगी ... जो कि खाल छील देने वाला अनुभव होगा अगर आप एक आम आदमी को ये कष्ट नही देना चाहते तो... ये सुरंग "उत्तरी ध्रुव" से शुरू कर... दक्षिणी ध्रुव पर निकालना सबसे बेहतर उपाय रहेगा क्यों? क्योंकि ध्रुवो पर पृथ्वी का रोटेशन शुन्य है।
तो नार्थ पोल से बनाई जब इस सुरंग में भावना जी गिरेंगी तो सबसे इम्पोर्टेन्ट फैक्टर होगा... Air Friction !!! जब भी हम कोई गेंद फेंकते है तो गेंद हवा के अणुओ से टकरा कर घर्षण के कारण अपना वेग खो के रुक जाती है उसी प्रकार... अगर सुरंग में हवा होगी तो भावना जी एक अधिकतम वेग प्राप्त करने के बाद जैसे जैसे केंद्र की तरफ बढ़ेंगी .. वैसे वैसे उनकी गति शुन्य होती जायेगी केंद्र पर पहुच कर... चूँकि वो ऐसी स्थिति में होंगी .. जहाँ उनके चारो तरफ बराबर मात्रा में मौजूद पृथ्वी का द्रव्यमान उन्हें अपनी तरफ खींच रहा होगा इसलिए केंद्र में जाके भावना जी हवा में भारहीन होके त्रिशंकु की तरह हमेशा के लिए स्थिर हो जायेगी ।
पर अगर मान लिया जाए कि अगर हम इस सुरंग में किसी तरफ Air Friction Free Vacuum मेन्टेन कर पाते है तो स्थिति कुछ और होगी.... वैक्यूम टनल में... भावना जी का वेग केंद्र तक पहुचते पहुचते 29000 km/hour हो चुका होगा और... भावना जी इस वेग के साथ... केंद्र को सनसनाती गोली की तरह पार कर जायेगे लेकिन... जैसे ही केंद्र को पार करके... भावनाजी... दक्षिणी ध्रुव की तरफ बढ़ेंगी वैसे वैसे... पृथ्वी की ग्रेविटी के कारण उनकी स्पीड कम होनी शुरू हो जायेगी कूदने के लगभग 42 मिनट बाद....दक्षिणी ध्रुव स्थित सुरंग के छोर तक पहुचते पहुचते.. जीरो हो चुकी स्पीड के साथ... भावना जी सुरंग के दूसरे सिरे से निकल कर हवा में दो चार मीटर ऊपर तक निकल जायेगी और अगर उन्हें दूसरे छोर पर खड़े किसी मनुष्य ने अगर "कैच" नही कर लिया तो...
तो.. भावना जी वापस सुरंग में गिर जाएँगी और उनका सफ़र दोबारा चालु हो जाएगा और ऊपर लिखी प्रक्रिया दोहराई जायेगी और अनंत काल तक भावना जी.. "नार्थ पोल से गिरे, साउथ पोल पे निकले" तथा... "साउथ पोल से गिरे, नार्थ पोल पे निकले" वाली क्रिया दोहराते रहेंगी !!!
.
कहानी खत्म... पैसा हजम !!!
Well... कहीं आप भावना जी को कैच करने की तो नही सोच रहे?
************************
Thanks For Reading !!!
By I am nature #0003
No comments:
Post a Comment