एक ना एक दिन... सूर्य के चक्कर लगाते सभी 8 ग्रह... एक सीधी रेखा में आ जायेगे... और जिस दिन ऐसा होगा... उस दिन पृथ्वी पर क़यामत आ जायेगी। सभी ग्रहों का सम्मिलित गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी पर प्रचंड सुनामी तथा भूकंपो को जन्म दे देगा। पृथ्वी फट कर टुकड़ो टुकड़ो में विभक्त हो जायेगी और... पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवो को कब्र बन जायेगी।
Hold On A Sec...
अभी जो मैंने कहा... वो ज्योतिषियों, कांस्पीरेसी थ्योरीस्ट, हॉलीवुड मूवीज के निर्देशको की एक बेहतरीन कल्पना के रूप में अक्सर हमारे सामने आती रही है। 5 खगोलीय पिंडो (बुध,मंगल,शुक्र,बृहस्पति,शनि) का एक रेखा में आना प्राचीन सभ्यताओ में निर्माण और विध्वंस का चिन्ह माना जाता था। हिन्दू सभ्यता में इन ग्रहो के एक सीध में आने को युगों में परिवर्तन का चिन्ह माना गया है
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लेकिन.. वैसे 5 ग्रह ही क्यों?
क्योंकि इन 5 ग्रहो को नंगी आँखों से देखा जा सकता है...इन 5 ग्रहों के पार मौजूद ग्रहो को देखने के लिए टेलिस्कोप की जरुरत होती है... इसलिए विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताओ को सिर्फ 5 ग्रहो का ही ज्ञान था...
खैर....ग्रहो के एक सीध में आने का कोई विध्वंसक प्रभाव हो सकता है क्या?
उत्तर है.. नही !!!
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First come First...चूँकि ग्रहो का सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाने का पथ (Orbit).... पृथ्वी के ऑर्बिट के सापेक्ष 1-7 डिग्री तक Tilted है... (पूरी तालिका कमेंटबॉक्स में)
इसलिए... ब्रह्माण्ड के इतिहास में... सभी ग्रहो का एक परफेक्ट सीधी रेखा में आ पाना... असंभव है !!!
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सरल शब्दों में... अगर आप सूर्य पर खड़े होकर अपनी आँख की सिधाई में एक रेखा खींचे... तो आपको सोलर सिस्टम के सभी 8 ग्रह एक साथ उस रेखा पर दिख जाए... ये असंभव है। पर हाँ... ये अवश्य संभव है कि...अगर आपकी आँखों से 30 डिग्री का कोण बनाया जाए.. तो संभव है कि सोलर सिस्टम के ज्यादातर ग्रह समय समय पर एक साथ उस 30 डिग्री के एरिया में एक साथ आते रहे... ऐसा पहले भी होता रहा है I अर्थात... रात के आसमान में इन ग्रहो का सीधी रेखा में आना असंभव है लेकिन.. इन ग्रहो को एक दूसरे के आजु बाजू देखा जा सकता है।
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4 फरवरी 1962 को, सूर्य-चंद्रमा-बुध,मंगल,शुक्र,बृहस्पति,शनि... सिर्फ 17 डिग्री के अंतर से... रात के आसमान में... आकाश के एक छोटे से हिस्से में एक साथ और पास पास देखे गए थे। मई 2000 को भी... सोलर सिस्टम के अंदरुनी 5 ग्रह सिर्फ 25 डिग्री के अंतर से एक दूसरे के पास आकर आकाश में लगभग एक सीधी रेखा में आये थे। पर इसका कोई प्रभाव पड़ा होता तो क्या आप आज मेरी पोस्ट पढ़ पा रहे होते?
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नासा ने कैलकुलेट किया है कि.. अगर सोलर सिस्टम के सभी ग्रहो, उल्कापिंडों, धूमकेतुओं, चन्द्रमाओ को एक साथ पृथ्वी के सापेक्ष एक सीधी रेखा में रख दिया जाए तो भी... सभी आकाशीय पिंडो की सम्मिलित ग्रेविटी... पृथ्वी पर आने वाले ज्वार भाटे के स्तर को .04 मिलीमीटर बढ़ाने के अलावा... कुछ और करने में सक्षम नही होगी।
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अगली बार आपको सोलर सिस्टम के अंदरुनी 5 ग्रह आकाश में एक साथ, एक दूसरे के सबसे करीब देखने हो तो.. For Your Calendar... ऐसा 8 सितम्बर 2040 में होगा। अगर आप उस वक़्त तक जीवित होंगे तो मेरी यही सलाह है कि... दुनिया के अंत की गप्पबाजी पे ध्यान ना दें... ज्योतिषियो के चक्कर ना लगाए। अफवाहों को दरकिनार करे।
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Just Relax That Evening...Sit Down...Open Up A Absolute Vodka & Watch Out The Rare Cosmic Planetary Show !!!
Thanks For Reading !!!
By I am nature #0002
Hold On A Sec...
अभी जो मैंने कहा... वो ज्योतिषियों, कांस्पीरेसी थ्योरीस्ट, हॉलीवुड मूवीज के निर्देशको की एक बेहतरीन कल्पना के रूप में अक्सर हमारे सामने आती रही है। 5 खगोलीय पिंडो (बुध,मंगल,शुक्र,बृहस्पति,शनि) का एक रेखा में आना प्राचीन सभ्यताओ में निर्माण और विध्वंस का चिन्ह माना जाता था। हिन्दू सभ्यता में इन ग्रहो के एक सीध में आने को युगों में परिवर्तन का चिन्ह माना गया है
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लेकिन.. वैसे 5 ग्रह ही क्यों?
क्योंकि इन 5 ग्रहो को नंगी आँखों से देखा जा सकता है...इन 5 ग्रहों के पार मौजूद ग्रहो को देखने के लिए टेलिस्कोप की जरुरत होती है... इसलिए विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताओ को सिर्फ 5 ग्रहो का ही ज्ञान था...
खैर....ग्रहो के एक सीध में आने का कोई विध्वंसक प्रभाव हो सकता है क्या?
उत्तर है.. नही !!!
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First come First...चूँकि ग्रहो का सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाने का पथ (Orbit).... पृथ्वी के ऑर्बिट के सापेक्ष 1-7 डिग्री तक Tilted है... (पूरी तालिका कमेंटबॉक्स में)
इसलिए... ब्रह्माण्ड के इतिहास में... सभी ग्रहो का एक परफेक्ट सीधी रेखा में आ पाना... असंभव है !!!
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सरल शब्दों में... अगर आप सूर्य पर खड़े होकर अपनी आँख की सिधाई में एक रेखा खींचे... तो आपको सोलर सिस्टम के सभी 8 ग्रह एक साथ उस रेखा पर दिख जाए... ये असंभव है। पर हाँ... ये अवश्य संभव है कि...अगर आपकी आँखों से 30 डिग्री का कोण बनाया जाए.. तो संभव है कि सोलर सिस्टम के ज्यादातर ग्रह समय समय पर एक साथ उस 30 डिग्री के एरिया में एक साथ आते रहे... ऐसा पहले भी होता रहा है I अर्थात... रात के आसमान में इन ग्रहो का सीधी रेखा में आना असंभव है लेकिन.. इन ग्रहो को एक दूसरे के आजु बाजू देखा जा सकता है।
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4 फरवरी 1962 को, सूर्य-चंद्रमा-बुध,मंगल,शुक्र,बृहस्पति,शनि... सिर्फ 17 डिग्री के अंतर से... रात के आसमान में... आकाश के एक छोटे से हिस्से में एक साथ और पास पास देखे गए थे। मई 2000 को भी... सोलर सिस्टम के अंदरुनी 5 ग्रह सिर्फ 25 डिग्री के अंतर से एक दूसरे के पास आकर आकाश में लगभग एक सीधी रेखा में आये थे। पर इसका कोई प्रभाव पड़ा होता तो क्या आप आज मेरी पोस्ट पढ़ पा रहे होते?
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नासा ने कैलकुलेट किया है कि.. अगर सोलर सिस्टम के सभी ग्रहो, उल्कापिंडों, धूमकेतुओं, चन्द्रमाओ को एक साथ पृथ्वी के सापेक्ष एक सीधी रेखा में रख दिया जाए तो भी... सभी आकाशीय पिंडो की सम्मिलित ग्रेविटी... पृथ्वी पर आने वाले ज्वार भाटे के स्तर को .04 मिलीमीटर बढ़ाने के अलावा... कुछ और करने में सक्षम नही होगी।
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अगली बार आपको सोलर सिस्टम के अंदरुनी 5 ग्रह आकाश में एक साथ, एक दूसरे के सबसे करीब देखने हो तो.. For Your Calendar... ऐसा 8 सितम्बर 2040 में होगा। अगर आप उस वक़्त तक जीवित होंगे तो मेरी यही सलाह है कि... दुनिया के अंत की गप्पबाजी पे ध्यान ना दें... ज्योतिषियो के चक्कर ना लगाए। अफवाहों को दरकिनार करे।
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Just Relax That Evening...Sit Down...Open Up A Absolute Vodka & Watch Out The Rare Cosmic Planetary Show !!!
Thanks For Reading !!!
By I am nature #0002
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