Wednesday, June 20, 2018

Life is about being happy internally!

When you are a kid, you always wonder what life would be like after growing up! How fun it is to go to office and not worry about the studies or the school, teachers or all the mundane tasks of a student life!

Little do we realize that those golden days are the best that life will ever ever give you! And when the reality hits, it gets too late too late to flip those pages of life back and enjoy every second and cherish what we had.

I always get these thoughts that why is one always yearning for the past to return, to make things better or to reverse some decisions that we made. Why we never live in the moment, soak ourselves in the present and just swim through life like a pro instead of mulling over the past.
Well our minds have been conditioned to believe in the "not so perfect" scenario all the time right from our birth, that life will be better only if we do certain things, and we lead the entire life struggling to get that one perfect moment which makes sense to our over conditioned sensibilities, which actually is just a bubble! There is no such thing as a perfect day or perfect moment. All is perfect now, whether you have what you desire or you don't. This moment right now is perfect in every sense, cause you are alive, breathing, your cells are responding to you, your body is fighting hundred thousands bacteria in every second, your cells are being repaired, your heart is beating, and your senses are working...in short you are ALIVE!!!

Life is the biggest gift you have and every day when you wake up it is a new opportunity for you to make things wonderful and live your day like their is no tomorrow! To make up for lost things or moments, to give a hug to someone in need, help people in need, and take a step forward to make your dreams come true. We have only 24 hrs in a day and every second counts trust me.

So why repent when life is giving you the chance to take things in a new direction. No day is same, every morning is different and so is the night. When nature doesn't believe in repeating itself then why should we.

We should teach this to even younger ones in the family to learn to be happy first, rest is just life which is all about making efforts constantly and it never stops unless we die.

So start living your day happily with what you have right now, cause nothing is lost till you are alive.

regards


Thursday, June 14, 2018

हमें भारतीयों की गरीबी और कुपोषण क्यों नहीं दिखाई देता ?


एक प्रश्न पूछते है. भारत में आज पैदा हुआ एक बच्चा लगभग 70 वर्ष तक जीवित रहेगा, जबकि वही बच्चा अगर विकसित देशो में पैदा होता तो वह आसानी से 80 वर्ष पार कर जाएगा. दूसरे शब्दों में, भारत में बच्चों को समय से पहले क्यों मरना चाहिए जबकि अगर वे अमीर देशों में पैदा हुए होते, तो वे जीवित रहते.
वर्ष 2015 में अर्थशास्त्र में नोबेल प्राइज विजेता प्रोफेसर एंगस डेटन के अनुसार पश्चिम के पुरुषो और महिलाओं जितनी लम्बाई प्राप्त करने के लिए भारतीय पुरुषो को 200 वर्ष और भारतीय महिलाओं को 500 वर्ष लगेंगे. 
मैंने हाइट का आकड़ा केवल इसलिए दिया की इसे समझना सरल है. बहुत से आंकड़े है जो बताते है की हमारा - भारतीयों का - शारीरिक और मानसिक विकास पीछे रह गया है. हमें भारतीयों की गरीबी और कुपोषण क्यों नहीं दिखाई देता? क्यों?
हमारे शारीरिक विकास में कमी और कुपोषण के क्या कारण है? 
सबसे पहले मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि हमारी अनुवांशिकी या जीन्स का हमारे ठिगने शरीर और कुपोषण में कोई योगदान या जिम्मेवारी नहीं है. अनुवांशिकी कुछ लोगो की हाइट प्रभावित कर सकती है, लेकिन एक बड़ी जनसँख्या में अनुवांशिकी का रोल लम्बाई निर्धारित करने में नगण्य होता है.
एक आम फ़्रांसिसी की हाइट 19 सदी के मध्य में पांच फ़ीट पांच इंच थी, जबकि अब यह पांच फ़ीट दस इंच हो गयी है.
प्रोफेसर डेटन के अनुसार लम्बाई में कमी का प्रमुख कारण बचपने और किशोरावस्था में या तो सही पोषण का अभाव है, या फिर अस्वच्छ वातावरण में रहने का असर है जिसमे अच्छे भोजन के बावजूद बीमारी के बोझ – ध्यान दीजिये, बीमारी के बोझ (ना कि बीमारी) - के कारण एक व्यक्ति समय-समय पर अस्वस्थ रहता है और परिणामस्वरूप शरीर ठिगना रह गया.
अस्वच्छ वातावरण में ना सिर्फ अशुद्ध पानी शामिल है, बल्कि कूड़ा-कचरा और प्रदूषण भी. इस गन्दगी का बोझ ना केवल आम भारतीयों को बीमार रखता है, बल्कि उस बीमारी का बोझ शरीर को निचोड़ देता है. 
बीमार व्यक्ति ना तो नौकरी पे जा पाता है, ना मजूरी या खेती या व्यवसाय कर सकता है. परिणामस्वरूप  पारिश्रमिक ना मिलने या आय ना होने के कारण वह स्वयं और परिवार के लिए भोजन नहीं खरीद सकता जिससे वे सब कुपोषण का शिकार हो जाते है. दुर्बल शरीर के कारण वह पूरी शक्ति से कार्य नहीं कर पाता जिससे कम आय के कारण उसे अन्न और खाद्य सामग्री खरीदने में कठिनाई आती है. एक तरह से वह गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाता है.
अगर आप को लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को केवल सुन्दर बनाने के लिए स्वच्छता अभियान चलाया है, गंगा-यमुना को निर्मल बनाने का प्रयास कर रहे है, तो आप आंशिक रूप से सही है. क्या आप को अपने घर के अंदर कूड़ा-कचरा पसंद है?
प्रधानमंत्री मोदी भारत को इसलिए स्वच्छ बनाना चाहते है क्योकि एक स्वच्छ वातावरण हमारे स्वास्थ्य, हमारे कल्याण और हमारी आय के लिए आवश्यक है. अगर भारत वर्ष 2022 तक स्वच्छ हो गया तो हम अगली दो पीढ़ियों में पच्छिमी देशो के नागरिको की तरह स्वस्थ और लम्बे हो जाएंगे.

By I am nature #0009

Monday, June 11, 2018

मेरे आराध्य "शिव" को अर्पित खंड - २

हे महायोगी !
दूर प्रयाग में कहीं
कर रहा कोई
संध्या बाती
प्रिय तेरा 
मन करे अर्पण

मन
एक गोल सिक्का
आरती के थाल में
सिक्कों की खनखन

हे नीलकंठी !
चटक-चटक झर रहा
नीला गगन
सहज शुभ्र हो रही
जाबालि-नगरी
भर रही पनिहरिनें

पंचरंग गगरी..... तुम्हारी "काशी"

By I am nature #0008

Tuesday, June 5, 2018

दिल की "ऑइलिंग ग्रीसिंग"

एक दिन
झाड़ कर देखा उसने
दिल मेरा..
ना जाने क्या-क्या उठाये फिरते हो
कहती है I

ये बरसों पुरानी घिसी-पिटी कहानियाँ
और वो जो अब कोई देखता नहीं
वो बचपन की निशानियाँ II

कितना बोझ हो गया है
लाओ इसे झाड़ कर साफ कर दूँ
धो कर सुखा दूँ धूप में

और फिर से इसे नया सा कर दूँ ...

By I am nature #0007

Saturday, June 2, 2018

Our responsibility as humans!

When i got up in the morning today a lot of tasks were running in my mind which i had set out to achieve in a day, and yes not to mention along with a 2 year old kid! I have always been very optimistic of my capabilities and very ambitious at the same time, even though m well aware than along with a kid even 50% is good percentage to achieve!

Anyways as usual i sat in my balcony soon after getting up to relax for few minutes along with my son. In a split second i saw my son throwing clothes hanging up for drying, off the balcony! That is his usual game...yes pretty much :/ Annoyed as i was i quickly took him inside and went downstairs to pick up those things.

And then i witnessed a very sad picture of a sparrow lying dead on the cemented floor of the parking. Its feathers were not damaged which obviously proves that the reason was something else. It just broke my heart to see something like this in the morning. Well obviously i couldn't leave it just like that, so i went down again, along with a newspaper and wood stick to bury it safely in the society's small garden space.

Many of us have witnessed this in our lives, either on a road side or in our personal spaces of lawns or gardens. The reason for this apart from accidents that are unavoidable is SUMMER SEASON. Of course we can't do much about the weather, but as responsible humans we can place water bowls in a few places like our gardens or spaces outside windows or common areas of the society or community where we live. It takes hardly few minutes but will give you a positive feeling which will make much more happy and trust me kindness always creates ripple effect .This simple act can save lives of many creatures who are helpless when it comes to seeking basic necessities to survive on this planet.

We are cutting tress to build beautiful buildings and spaces but are dooming ourselves to a much dangerous scenario.

It is not that difficult to be a environmental contributor or do things that can help other species survive better.
I hope every reader takes steps to do their small bit, after all more the number of helping hands the better it is for everyone!

Thank you!


अविश्वास की महंगी कीमत हम अपनी जेब से चुकाते है


वर्ष 2016 के अर्थशास्त्र नोबेल पुरुस्कार विजेता ओलिवर हार्ट (उन्होंने नोबेल प्राइज बेन्ग होल्म्स्टॉर्म के साथ शेयर किया था) और सैंडी ग्रॉसमैन ने एक अकादमिक पेपर में प्रश्न पूछा: एक कंपनी के स्वामी को क्या अधिकार है जो एक गैर-स्वामी को प्राप्त नहीं है?
उन्होंने उत्तर दिया कि अगर किसी कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट के भविष्य में मिलने वाली किसी भी चुनौती के बारे में एक-एक धारा को साफ़-साफ़ लिखा है, तो उस कंपनी के स्वामी को गैर स्वामी के बदले कोई लाभ नहीं है.
लेकिन कोई भी कॉन्ट्रैक्ट सम्पूर्ण नहीं होता, जिसके कारण कॉन्ट्रैक्ट में लिखी किसी भी धारा के बाहर अगर कुछ घटित होता है तो कंपनी का स्वामी जो चाहे कर सकता है. 
उदाहरण के लिए, किसी कंपनी को दस हज़ार सेल फोन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. लेकिन वह कंपनी 11 हज़ार सेल फ़ोन बना लेती है और एक हज़ार सेल फ़ोन पे टैक्स नहीं देती. अब यह प्रूव करना होगा कि उस एक हज़ार सेल फ़ोन का उत्पादन गैर क़ानूनी है जिसके लिए कोर्ट जाना पड़ सकता है. कंपनी कह सकती है कि कॉन्ट्रैक्ट पे दस हज़ार स्मार्ट सेल फोन लिखा था और उसने एक हज़ार सामान्य सेल फ़ोन उन्ही दस हज़ार सेल फ़ोन के पुर्जे से बना दिए जो स्मार्ट नहीं है और वह केस जीत सकती है. 
एक तरह से परफेक्ट या सम्पूर्ण कॉन्ट्रैक्ट असंभव है क्योकि हमें मानव स्वाभाव और भविष्य के बारे में कुछ भी पता नहीं है. कंपनी आस्तित्व में इसलिए है क्योकि कंपनी, उपभोक्ता और सरकार के मध्य विश्वास की कमी है. क्योकि कंपनियां ही कॉन्ट्रैक्ट में लिखे के बाहर के (residual claim) क्लेम को अपने फेवर में सुनिश्चित कर सकती है. किसी झगड़े की स्थिति में कोर्ट अलिखित धारा के तहत कंपनी के फेवर में फैसला देगी. जैसा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन पे सरकार के 20,000 करोड़ रुपये के टैक्स का केस वोडाफोन के फेवर में दिया.
बाज़ारी शक्ति वस्तुओं के उत्पादन को कम से कम दाम पे सुनिश्चित करती है, जबकि पदानुक्रम या hierarchy समन्वय या ताल-मेल (उत्पादन के हर स्तर को ठीक-ठाक चालू रखना) के दाम को कम करती है.
इस विधा को ट्रांसैक्शन कॉस्ट इकोनॉमिक्स (Transaction Cost Economics) का नाम दिया गया, जिसके अनुसार हर लेन-देन (transaction) की कीमत होती है; जिसमे इस बात का अध्ययन होता है कि कंपनी और बाजार का घाल-मेल कैसे होता है.
लेकिन ब्लॉक चेन तकनीकी के आविष्कार ने इस अपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट के कन्सेप्ट को चुनौती दे दी है. कंपनी के स्वामी, सरकार और उपभोक्ता के मध्य हुए कॉन्ट्रैक्ट की एक-एक धारा ब्लॉक चेन पे दर्ज है. बिना तीनो पक्षों की सहमति के कॉन्ट्रैक्ट बदला नहीं जा सकता. अगर किन्ही दो पक्ष के मध्य कोई लेन-देन हुआ है तो ब्लॉक चेन के पूरे नेटवर्क पे सबको पता चल जाएगा जैसे कि वोडाफोन के कितने कस्टमर है, कितना राजस्व प्राप्त हुआ, कितना लाभ हुआ और कितना टैक्स दिया. झगड़े या कोर्ट की कोई जगह ही नहीं है. क्योकि कंपनी अगर केस कोर्ट ले गयी तो वहां उसकी हार सुनिश्चित है.
ब्लॉक चेन में सारे नेटवर्क पे सबको पता चल जाता है कि क्या लेन-देन हुआ है; यह पता चल जाता है कि कंपनी ने जो माल आपको बेचा है उसका स्वामित्व कंपनी के पास है या नहीं; और उस लेन-देन का सबूत ब्लॉक चेन पे रजिस्टर हो जाता है. किसी भी एंट्री को बदलने के लिए उस नेटवर्क पे जुड़े सभी कंप्यूटर पे एंट्री बदलनी होगी.
इस ब्लॉक चेन से कंपनी, सरकार, टैक्स विभाग, बैंक, इन्शुरन्स, ट्रांसपोर्ट, निवेश में हुवे सारे लेन-देन जुड़ जायँगे जिससे व्यवस्था में पूर्ण रूप से पारदर्शिता आ जायेगी.
अब किसान सीधे मंडी और उपभोक्ता से जुड़ जाएगा और उपभोक्ता से मिलने वाले पैसे की सीधे-सीधे जानकारी ले सकेगा.  
चूंकि आने वाले समय में तकनीकी से विश्वास को लागू किया जाएगा, अतः कंपनी, बैंक इत्यादि का आस्तित्व खतरे में आ सकता है.

By I am nature #0006

Friday, June 1, 2018

सुनो !!

सुनो !!

न किसी के अभाव में जियो
न किसी के प्रभाव में जियो
आप ही की ज़िन्दगी है साहब
आप अपने स्वाभाव में जियो II

बहुतेरे दिन कट गए दूसरों को दिखाने- समझाने में
बड़े चौड़े पापड़ बेले आप ने उन्हें मनाने में
अब लगाएं थोड़ा ध्यान बटर चिकन खाने में
सभी तो लगे हैं अपने अपने घरोंदे बनाने में II

बढ़ी भटकी थी मेरी आत्मा पिछले जनम में
कभी बन्दर, कभी चींटी तो कभी गधे के काम में I
अब जा कर जन्मा हूँ मैं मनुष्य के "अवतार" में,
काहे बिताऊं हर शाम जिस किसी के दरबार में ?

तकिये के नीचे दबा के रखे हैं तुम्हारे ख्याल
एक तस्वीर, बेपनाह इश्क़ और बहुत सारे साल
रोज "संवर" के आया करो मेरी कलम के ख्वाबों में
मैं यूँ ही जी लिया करूँगा आप ही के "स्वभावों" में  II

By I am nature #0005