एक दिन
झाड़ कर देखा उसने
दिल मेरा..
ना जाने क्या-क्या उठाये फिरते हो
कहती है I
ये बरसों पुरानी घिसी-पिटी कहानियाँ
और वो जो अब कोई देखता नहीं
वो बचपन की निशानियाँ II
कितना बोझ हो गया है
लाओ इसे झाड़ कर साफ कर दूँ
धो कर सुखा दूँ धूप में
और फिर से इसे नया सा कर दूँ ...
By I am nature #0007
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